
शेखावाटी की जनता हमेशा ही धर्मपरायण रही है ,यहाँ वाशिंदों में हनुमान जी के प्रति असीम आस्था है | इस क्षेत्र में हनुमान जी महाराज को पाताल का स्वामी भी माना जाता है इसलिए जब भी किसी कुए या टुबवेल की खुदाई की जाती है उस स्थान पर सबसे पहले बजरंग बलि का "देवरा"(मन्दिर ) बनाया जाता है बजरंग बलि की स्थापना के बाद ही कुए आदि का निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है ,और मेरा गाँव भगतपुरा तो क्रषि प्रधान गाँव है और यहाँ हर खेत में सिंचाई के लिए कुए है जाहिर है कुए है तो बजरंग बली के "देवरे " ( मन्दिर) तो पहले बनेंगे ही , बिना बजरंग बली के तो कुए या ट्यूब वेल का निर्माण होना यहाँ असंभव ही है ,गाँव का हर एक किसान साल में एक बार बजरंग बली को खुश रखने के लिए जागरण व सवा मणी जरुर करता है ,सवा
मणी में दाल व चूरमा बना कर सभी गाँव वाशियों को खाने का आमन्त्रण दिया जाता है | में तो जब गाँव जाती हूँ किसी के यहाँ सवा मणी हो इसका इंतजार रहता है आख़िर बजरंग बली के प्रसाद में मिलने वाला दाल चूरमा का स्वाद भी तो मजेदार होता है
कु. राजुल शेखावत
५ दिन की लास वेगस और ग्रेन्ड केनियन की यात्रा के बाद आज ब्लॉगजगत में लौटा हूँ. मन प्रफुल्लित है और आपको पढ़ना सुखद. कल से नियमिल लेखन पठन का प्रयास करुँगा. सादर अभिवादन.
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